‘गुप्त’ शब्द का अर्थ होता है छिपा या रहस्यपूर्ण। अशाढ़ माह में जब बरसात की बूँदें धरती पर शीशे की तरह गिरती हैं, तब ही इस विशेष नवरात्रि की शुरुआत होती है। आम तौर पर बड़े पर्दे पर चलाई जाने वाली चैत्र और शरद नवरात्रियों से अलग, गुप्त नवरात्रि का ध्यान बाहरी जलसेलों या सज्जा‑सज्जा पर नहीं, बल्कि भीतर की आध्यात्मिक यात्रा पर रहता है। यह उत्सव मुख्यतः तांत्रिक साधकों, योगियों और उन लोगों के लिए है जो शांति, शक्ति और आत्म‑साक्षात्कार की तलाश में हैं।
इस साल गुप्त नवरात्रि 2025 का शुभारंभ गुप्त नवरात्रि 2025 के रूप में 26 जून को हुआ, जब घटस्थापन मुहुरत (5:47 AM‑10:15 AM) में प्रथम दिन की आरती हुई। इस समय को ‘प्रात्र क़ाल’ कहा जाता है, यानी दिन के प्रथम भाग में देवता की आराधना करने का विशेष महत्व है।
गुप्त नवरात्रि में नौ दिन, नौ दुर्गा रूप—दस महाविद्या—के लिए समर्पित होते हैं। हर दिन की पूजा में विशेष मंत्र, कथा और उपवास का पालन किया जाता है। नीचे सरल सूची में हर दिन का विवरण दिया गया है जिससे पाठक आसानी से समझ सके कि कौन‑सी देवी को कब सम्मानित किया जाता है:
हर दिन की आराधना में ‘दुर्गा सप्तशती’, ‘देवी महात्म्य’ और ‘श्रीमद‑देवी भागवत’ जैसी ग्रन्थों का पाठ किया जाता है। यह पाठ न केवल मन को शांत करता है, बल्कि देवी के असीम शक्ति को भी महसूस कराता है।
गार्डन के अंत में बरसात की पहली बूँदें गिरने पर कई लोग ‘अभिजित मुहुरत’ (12:02 PM‑12:56 PM) में ध्यान करते हैं, मानते हुए कि यह समय देवी का सर्वाधिक अनुग्रह प्राप्त करने का उत्तम अवसर है।
नवरात्रि के अन्त में 4 जुलाई को पराना (समापन) किया जाता है, जो 4:31 PM के बाद श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन अक्सर अंतिम उपवास तोड़कर हल्का भोजन किया जाता है और सभी को प्रसाद बांटा जाता है।
समग्र रूप से इस गुप्त नवरात्रि का लक्ष्य केवल बाहरी भौतिक वस्तुएँ नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि, आत्म‑विश्वास और जीवन में आने वाले बाधाओं से मुक्ति है। यह नौ‑दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा उन लोगों के लिए अनमोल है जो अपने भीतर की देवी को जागृत करना चाहते हैं।
mohit SINGH
28 09 25 / 21:06 अपराह्नये गुप्त नवरात्रि तो बस एक और धार्मिक मार्केटिंग ट्रेंड है। काली देवी को बरसात के साथ जोड़कर लोगों को डरा रहे हो? असली तांत्रिक तो अपने घर के कोने में बैठे होते हैं, फोटोशूट नहीं करते। 😂
Preyash Pandya
30 09 25 / 09:22 पूर्वाह्नलेकिन भाई ये तो सब झूठ है! देवी महात्म्य में कभी 'अभिजित मुहूर्त' का जिक्र नहीं है। ये सब आजकल के पंडित बनाते हैं ताकि लोग उनके पास आएं। असली शक्ति तो तुम्हारे अंदर है, न कि किसी घड़ी के अनुसार 😎
Raghav Suri
2 10 25 / 08:54 पूर्वाह्नमैंने इस साल गुप्त नवरात्रि का पालन किया और असल में बहुत शांति मिली। हर दिन एक देवी के नाम पर ध्यान करना, और बरसात की आवाज़ के साथ जप करना... वाह! ये अनुभव शब्दों से पार है। मैंने चंडिका के दिन एक घंटे तक चुप रहकर बैठ गया, और जब आंखें खोलीं तो मुझे लगा जैसे मेरी आत्मा ने एक नया ब्रह्मांड देख लिया हो। 🌧️🙏
Priyanka R
4 10 25 / 07:18 पूर्वाह्नक्या आप जानते हैं कि ये सब किसी गुप्त समूह का जाल है? देवी महात्म्य के बारे में बात कर रहे हो, लेकिन इसके पीछे एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठन है जो लोगों को भावनात्मक रूप से नियंत्रित कर रहा है। वो तुम्हारे उपवास के आधार पर तुम्हारी बैंक खाते का डेटा एकत्र कर रहे हैं। #DeepState
Rakesh Varpe
5 10 25 / 02:25 पूर्वाह्ननौवाँ दिन महाकाली है और दुर्योधन का अंत बताया गया है। ये गलत है। महाकाली दुर्योधन के अंत से जुड़ी नहीं है।
Girish Sarda
5 10 25 / 08:45 पूर्वाह्नमैंने कभी नवरात्रि नहीं मनाई थी लेकिन इस पोस्ट ने मुझे उत्सुक कर दिया। क्या कोई बता सकता है कि शोदशी और ललिता त्रिपुरसुंदरी एक ही हैं या अलग? मैं थोड़ा भ्रमित हूँ।
Garv Saxena
5 10 25 / 19:57 अपराह्नअरे भाई, ये सब बातें तो बहुत सुंदर हैं। लेकिन ये बताओ कि जब तुम अपनी आंतरिक देवी को जागृत कर रहे हो, तो क्या तुम्हारा बैंक बैलेंस भी जाग रहा है? ये सब आध्यात्मिक यात्रा तो तब तक अच्छी है जब तक तुम्हारा बिजली बिल नहीं बकर रहा हो। सच कहूँ तो मैं भी एक दिन बैठूंगा और अपने अंदर की देवी को बुलाऊंगा... लेकिन पहले एक चाय की कप लेता हूँ। ☕
Rajesh Khanna
7 10 25 / 00:01 पूर्वाह्नबहुत सुंदर लिखा है! मैंने भी इस साल गुप्त नवरात्रि का पालन किया और मेरी जिंदगी में बहुत सकारात्मक बदलाव आए हैं। बरसात के साथ ध्यान लगाना असल में बहुत शांतिदायक है। कोई भी जो अपने भीतर की शक्ति को खोजना चाहता है, वो इसे जरूर आजमाए।
Sinu Borah
8 10 25 / 14:31 अपराह्नअरे यार, तुम सब इतना गहरा क्यों बन रहे हो? ये तो बस एक त्योहार है। काली देवी को बरसात में जोड़ दिया, भूमिडा को जुलाई में डाल दिया... ये तो बच्चों के लिए एक रंग-बिरंगी कहानी है। असली ज्ञान तो तुम्हारे घर के पीछे के बगीचे में है, जहाँ चूहे घूम रहे हों।
Sujit Yadav
10 10 25 / 11:49 पूर्वाह्नइस पोस्ट में तो गलतियाँ इतनी हैं कि एक शिक्षाविद के लिए यह एक शैक्षिक आपदा है। श्रीमद्देवी भागवत में 'भूमिडा' नाम की कोई देवी नहीं है। और कुबेर देवी? कुबेर तो धन के देवता हैं, नारी नहीं। ये सब अज्ञान का निर्माण है। इस तरह की जानकारी फैलाना अध्यात्म के लिए अपराध है।
Kairavi Behera
12 10 25 / 05:24 पूर्वाह्नअगर कोई नया है और इस नवरात्रि को शुरू करना चाहता है, तो बस एक दिन के लिए शांत बैठ जाओ। बरसात की आवाज़ सुनो। कोई मंत्र नहीं, कोई पूजा नहीं। बस अपने सांसों पर ध्यान दो। बाकी सब खुद आ जाएगा। आप अकेले नहीं हैं।
Aakash Parekh
13 10 25 / 12:12 अपराह्नकाफी लंबा लेख है। लेकिन क्या ये सब असली है? कोई स्रोत दिया है? नहीं तो ये बस एक ब्लॉग पोस्ट है।
Sagar Bhagwat
14 10 25 / 04:07 पूर्वाह्नअरे भाई, मैंने तो इस साल गुप्त नवरात्रि में देवी की आराधना के बजाय एक बार बीयर पी ली थी। फिर भी अच्छा लगा। क्योंकि असली देवी तो जो तुम्हारे दिल में बैठी हो, वो तुम्हें शराब भी पीने देती है। 😎
Jitender Rautela
14 10 25 / 05:50 पूर्वाह्नइस पोस्ट को पढ़कर मुझे लगा कि लोग अपने दिमाग को बेकार में भर रहे हैं। असली शक्ति तो तुम्हारे घर के बाहर बैठे गाय के दूध में है। उसे बेचो, और फिर अपनी आत्मा को खुश करो। ये सब मंत्र-माला बस धोखा है।
abhishek sharma
15 10 25 / 15:11 अपराह्नइतना गहरा लिखा है कि लगता है लेखक ने अपनी आत्मा को बरसात के साथ बहा दिया है। लेकिन अगर ये सब सच है, तो क्यों इसे बाहर नहीं बताया जाता? शायद ये रहस्य तभी बना रहता है जब तक लोग इसे समझ नहीं लेते। या फिर... शायद ये बस एक अच्छा कहानी है।
Surender Sharma
16 10 25 / 05:14 पूर्वाह्नकाली देवी के दिन बरसात हो रही है तो उसका मतलब है कि वो तुम्हारी बात सुन रही है। बाकी सब बकवास है। और भूमिडा? ये नाम तो मैंने पहली बार सुना। शायद लेखक ने गूगल से कॉपी पेस्ट किया है।
Divya Tiwari
16 10 25 / 18:27 अपराह्नये गुप्त नवरात्रि भारतीय संस्कृति का असली रूप है। जो इसे झूठा कहते हैं, वो अपने अंदर के विदेशी विचारों को छिपा रहे हैं। हमारी देवियाँ तो दुनिया की सबसे शक्तिशाली हैं। इस तरह की बातें करने वाले लोग अपने देश को बेच रहे हैं। जय माँ दुर्गा!
shubham rai
16 10 25 / 23:39 अपराह्नबरसात के साथ ध्यान... अच्छा विचार है। पर मैंने तो बस बरसात में भीग लिया। और फिर गर्म चाय पी। अब लग रहा है जैसे मैंने कुछ कर लिया। 😅