इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने सोमवार को सूचित किया कि इंग्लैंड के महान क्रिकेटर और कोच ग्राहम थॉर्प का 55 वर्ष की आयु में निधन हो गया। थॉर्प को क्रिकेट मैदान पर उनके योगदान के लिए खूब सराहा जाता है, और उनकी मृत्यु से क्रिकेट समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है।
ग्राहम थॉर्प ने 13 साल लंबा अंतरराष्ट्रीय करियर जिया, जिसमें उन्होंने 100 टेस्ट मैच खेले और 6,744 रन बनाए, उनका बल्लेबाजी औसत 44.66 था। इसके अलावा, उन्होंने 82 वनडे इंटरनेशनल मैच भी खेले। उनके करियर को उनके शानदार और निरंतर प्रदर्शन के लिए याद किया जाएगा। वह काफी समय तक अपने काउंटी क्लब सरे के साथ जुड़े रहे, जहाँ उन्होंने अपने खेल को निखारा और पेशेवर रूप से उत्कृष्टता हासिल की।
खेल से संन्यास लेने के बाद, ग्राहम थॉर्प ने कोचिंग में हाथ आजमाया और इंग्लैंड टीम के साथ विभिन्न भूमिकाओं में 12 साल तक जुड़े रहे। उनकी कोचिंग में इंग्लैंड टीम ने अनेक महत्वपूर्ण मुकाबलों में जीत हासिल की है। 2022 में, उन्हें अफगानिस्तान क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया, लेकिन गंभीर बीमारी के कारण वह इस पद को संभाल नहीं पाए।
ग्राहम थॉर्प ने अपने जीवन में कई व्यक्तिगत संघर्षों का भी सामना किया। उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब उनकी पहली शादी समाप्त हो गई। लेकिन उनकी दूसरी पत्नी अमांडा के साथ उन्होंने एक स्थिर जीवन पाया। अपने निजी जीवन की कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने हमेशा अपने खेल और कोचिंग के लिए खुद को समर्पित रखा।
क्रिकेट जगत से ग्राहम थॉर्प को श्रद्धांजलि देने वाले कई महत्वपूर्ण नाम सामने आए हैं। पूर्व इंग्लैंड कप्तान माइकल वॉन और बेन स्टोक्स ने उन्हें 'शानदार खिलाड़ी और कोच' के रूप में याद किया। ECB ने उन्हें 'इंग्लैंड के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक' कहा और उन्हें 'क्रिकेट परिवार का एक प्रिय सदस्य' बताया। सरे क्रिकेट क्लब ने भी उनके योगदान का सम्मान करते हुए शोक व्यक्त किया।
ग्राहम थॉर्प के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके खेल कौशल और कोचिंग क्षमता ने न केवल इंग्लैंड क्रिकेट को समृद्ध किया, बल्कि उन्होंने अन्य क्रिकेटरों की आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक का काम भी किया। उनकी असमय मृत्य से क्रिकेट जगत में एक बड़ा शून्य उत्पन्न हो गया है। उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों को इस कठिन समय में संवेदना प्रकट की जा रही है।
ग्राहम थॉर्प का क्रिकेट में योगदान अमूल्य है। उन्होंने न केवल एक खिलाड़ी के रूप में बल्कि एक कोच के रूप में भी क्रिकेट को एक नई दिशा दी। उनके द्वारा इंग्लैंड टीम को दी गई कोचिंग ने टीम को कई उपलब्धियाँ दिलाईं। उनकी कोचिंग स्टाइल और रणनीतियाँ खिलाड़ियों को प्रेरित करती थीं।
ग्राहम थॉर्प का अंतरराष्ट्रीय करियर खास रहा। उन्होंने 100 टेस्ट मैच खेले और 6,744 रन बनाए। उनके कैरियर का औसत 44.66 रहा, जो उनकी उच्च गुणवत्ता को दर्शाता है। उन्होंने वनडे में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया और 82 मैचों में हिस्सा लिया।
ग्राहम थॉर्प ने अपने करियर की शुरुआत सरे काउंटी क्रिकेट क्लब से की। 17 साल तक वह इस क्लब का हिस्सा रहे और यहां उन्होंने अपनी बल्लेबाजी की विशेषता को निखारा। उनके खेल को देखकर आने वाले युवा क्रिकेटर बहुत प्रेरित हुए।
ग्राहम थॉर्प ने संन्यास के बाद कोचिंग को अपनाया। इंग्लैंड टीम के लिए 2010 से 2022 तक विभिन्न भूमिकाओं में उन्होंने टीम को प्रशिक्षित किया। उनकी कोचिंग के दौरान इंग्लैंड टीम ने कई महत्वपूर्ण मुकाबले जीते और नई ऊँचाइयों पर पहुँची। उनकी कोचिंग स्टाइल ने कई खिलाड़ियों को बेहतर बनाने में मदद की।
2022 में ग्राहम थॉर्प को अफगानिस्तान क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश गंभीर बीमारी के कारण वह यह भूमिका नहीं संभाल पाए। यह अफगानिस्तान टीम के लिए बड़ी हानि थी क्योंकि ग्राहम थॉर्प के अनुभव का लाभ टीम को मिल सकता था।
ग्राहम थॉर्प ने अपने जीवन में कई व्यक्तिगत संघर्षों का सामना किया। उनकी पहली शादी समाप्त हो गई थी, लेकिन दूसरी पत्नी अमांडा ने उन्हें स्थिरता दी। उनके जीवन में कई कठिनाइयाँ आईं, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने खेल और कोचिंग पर ध्यान केंद्रित किया।
उन्हें उनके परिवार और दोस्तों द्वारा याद किया जाएगा, और उनके योगदान को सराहा जाएगा। क्रिकेट जगत में ग्राहम थॉर्प की जगह को कोई नहीं भर सकता। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
Rakesh Varpe
7 08 24 / 09:53 पूर्वाह्नRIP Graham Thorpe. एक असली जिंदा इतिहास चला गया।
Raghav Suri
8 08 24 / 15:10 अपराह्नguy was pure class on the field and even better as a coach... i remember watching him bat in 98 and just thinking how calm he was under pressure. he taught so many young players how to build an innings properly, not just hit sixes. his patience was contagious. even when he was injured, he’d still be at the nets helping out. cricket lost a true gentleman today.
Kairavi Behera
9 08 24 / 20:44 अपराह्नग्राहम थॉर्प का बल्लेबाजी स्टाइल बहुत साफ था - कोई झटका नहीं, कोई बेकार की शॉट्स नहीं। बस बॉल को देखकर बल्ला चलाना। आज के युवा खिलाड़ी इसे सीखें तो बेहतर होगा।
shubham rai
11 08 24 / 08:28 पूर्वाह्नmeh... अभी तक तो बहुत लोग मर रहे हैं। 😐
Garv Saxena
12 08 24 / 22:00 अपराह्नyou know what’s ironic? He spent his whole life teaching people how to play cricket with discipline, but he died because the system failed him. No one noticed his health was failing until it was too late. Cricket boards care about stats and sponsorships, not the people who built the game. We glorify legends after they’re gone, but what did we do when they were alive? Nothing. Just applause and silence.
Priyanka R
14 08 24 / 16:27 अपराह्नwait... did you know his wife Amanda was secretly working with the ICC to replace him with a foreign coach? 😏 I heard from a friend of a friend that ECB was planning to sideline him for years. This isn't coincidence. It's a cover-up. 🤫
Sujit Yadav
16 08 24 / 08:26 पूर्वाह्नOne must question the quality of coaching when a man of his stature, with over 6700 Test runs, could not secure adequate medical attention. This speaks volumes about the institutional decay in modern cricket administration. A man who shaped generations was reduced to a statistic in a press release. Pathetic.
abhishek sharma
17 08 24 / 07:26 पूर्वाह्नi used to watch his innings on old VHS tapes with my dad. he’d pause it every time thorpe played a cover drive and say, 'that’s how you play the game, not like these kids today.' he was right. thorpe didn’t need fireworks. he just needed time and space. and he made both. rest in peace, sir.
Jitender Rautela
17 08 24 / 11:53 पूर्वाह्नलोग अभी तक उनकी याद में लिख रहे हैं... पर क्या किसी ने कभी उन्हें एक चाय पर बुलाया? कोचिंग के बाद बात करने वाला कौन था? सिर्फ फैन्स और मीडिया तो आते हैं।
Girish Sarda
17 08 24 / 22:57 अपराह्नi wonder how many of today's top players actually learned from him directly. i read somewhere that he spent hours with young batters at Surrey, not just talking technique but life. that’s rare these days. the game is becoming too fast, too loud. thorpe was the quiet voice that made you think
Rajesh Khanna
18 08 24 / 14:07 अपराह्नhe gave us more than runs. he gave us patience. in a world that wants instant results, he reminded us that greatness takes time. thank you, graham.
Sagar Bhagwat
19 08 24 / 21:00 अपराह्नnah bro, he was overrated. look at his average - 44.66? pfft. modern guys average 50+ with 40+ sixes a season. he played in the dark ages of cricket. we’re just being nice because he’s dead.
Gaurang Sondagar
21 08 24 / 20:01 अपराह्नindia should have recruited him earlier. we have no proper batting coaches. if he had come here, we would’ve had 5 more world cups by now. no one cares about our cricket culture. only england gets legends like this
Sinu Borah
23 08 24 / 10:03 पूर्वाह्नyou know what’s wild? He coached Afghanistan. That’s right. The same guy who shaped England’s golden generation ended up helping a team nobody took seriously. And yet, he didn’t care about the spotlight. That’s the real legacy - not the stats, not the titles. It’s the quiet belief in people no one else saw. That’s what hurts the most.
Surender Sharma
24 08 24 / 09:58 पूर्वाह्नgrraham thorpe? i think he was that guy who got out lbw every time. anyway, rest in peace i guess. 🤷♂️
Divya Tiwari
25 08 24 / 04:02 पूर्वाह्नthis is why we need to stop letting foreigners coach our players. thorpe was great, sure, but india doesn’t need english coaches to teach us how to bat. we had legends like sachin and dravid who knew cricket better than any foreigner ever could. this is cultural erosion.
Ron Burgher
25 08 24 / 23:36 अपराह्नif you can't handle pressure, you shouldn't be coaching. he was a good player, but he couldn't even take care of himself. that's weak. real men don't die from illness if they're disciplined.
Nitin Agrawal
27 08 24 / 12:20 अपराह्नhe was a good player but i heard he used to argue with umpires a lot. i mean, come on, he was always complaining about lbws. maybe that’s why he got sick - too much stress from arguing. 😅
Nadia Maya
27 08 24 / 14:35 अपराह्नHis batting was like a symphony. Each shot a note. Each innings, a movement. The world will forget the scores, but never the silence he brought to the crease - the kind that made bowlers question their own existence.